हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , यमन के सशस्त्र बलों ने कहा कि, यमन की जनता के खिलाफ अपराधी सऊदी शासन द्वारा लगभग 12 वर्षों से जारी घेराबंदी और सैन्य आक्रमण के बीच उनकी सेनाओं ने सऊदी अरब की ओर से बड़े पैमाने पर सैन्य गतिविधियों और सैनिकों की तैनाती का पता लगाया।
यह तैयारी अपने अंतिम चरण में थी और इसका उद्देश्य यमन के स्वतंत्र प्रांतों तथा यमन की जनता पर हमले तेज़ कर उन्हें अन्यायपूर्ण घेराबंदी समाप्त कराने की अपनी मांग से पीछे हटने के लिए मजबूर करना था।
इसी के जवाब में यमन के सशस्त्र बलों ने अल-रुवैक, अल-अबर और अल-थनिया क्षेत्रों सहित तथाकथित “प्रथम और तृतीय आपातकालीन ब्रिगेड” से जुड़े अन्य सैन्य शिविरों पर बड़ी और विशेष सैन्य कार्रवाई की। इस अभियान में बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
देश के पूर्वी हिस्से में स्थित अल-वदीआ क्षेत्र में दुश्मन के कई शिविर, जमावड़ा स्थल, गोदाम और हथियारों के भंडार नष्ट होकर आग की चपेट में आ गए।निशाना बनाए गए शिविरों में मौजूद बड़ी संख्या में सैन्य उपकरण और सैन्य वाहन भी नष्ट कर दिए गए।
यमन के सशस्त्र बलों ने सऊदी अरब को चेतावनी देते हुए कहा कि, वह यमन और उसकी जनता के ख़िलाफ़ किसी भी नए सैन्य दुस्साहस से बाज़ आए। उन्होंने कहा कि, यदि तनाव बढ़ता है तो उसके सभी परिणामों की जिम्मेदारी स्वयं सऊदी शासन की होगी।
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